MP TET- उच्च माध्यमिक शिक्षक ( वर्ग -1) पात्रता परीक्षा पाठ्यक्रम I कला समूह – राजनीतिशास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र

मध्यप्रदेश में उच्च माध्यमिक शिक्षक ( वर्ग 1 या हायर सेकेंडरी शिक्षक ) की भर्ती के दो चरण होतें है – पहली परीक्षा पात्रता परीक्षा (Eligibility Test ) एवं दूसरी परीक्षा चयन परीक्षा ( Selection Test) कहलाती है . पहली परीक्षा यानि पात्रता परीक्षा 150 अंक की होती है जिसमें दो भाग होते हैं भाग अ – 30 अंक के 30 प्रश्न होते हैं जो सभी विषय के अभ्यर्थियों के लिए एक सामान होते हैं . दूसरा भाग ब – इसमें विषयवार 120 अंक का होता है . इसमें 120 प्रश्न होते है . इस प्रकार कुल 150 अंक का विषयवार एक प्रश्नपत्र होता है . चयन परीक्षा में केवल विषयवार कुल 100 प्रश्न होते हैं जो कि 100 अंक के होते हैं . पात्रता परीक्षा में उत्तीर्ण ( जनरल 60 % अन्य सभी 50 %) अभ्यर्थी दूसरे चरण यानि चयन परीक्षा में शामिल हो पाते हैं .

इस पोस्ट में उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद हेतु प्रथम चरण यानि पात्रता परीक्षा का विषय अनुसार भाग ब का कला समूह -यानि राजनीतिशास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र का पूर्ण सिलेबस दिया गया है . इसे अधिकृत वेबसाईट से लिया गया है . अन्य सभी प्रमुख विषयों का सिलेबस इस वेबसाईट पर उपलब्ध है .

120 MCQ / 120 Marks

राजनीति विज्ञान (Political Science)

मुख्य चयन विषय पाठ्यक्रम

  • राजनीति विज्ञान: परिभाषा, प्रकृति व क्षेत्र, प्रकृति के राजनीतिक सिद्धान्त (परम्परावादी व आधुनिक), व अन्य विषयों से संबंध [48]।
  • शक्ति एवं अधिकार: राज्य की उत्पत्ति, साम्राज्यवाद, बहुलवादी आलोचना [48]।
  • नागरिक अधिकार: मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, राज्य के नीति निर्देशक तत्व, मानव अधिकार, स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय [48]।
  • प्रजातंत्र: प्रजातंत्र का अर्थ, प्रतिनिधित्व के सिद्धान्त, विकास एवं कल्याणकारी राज्य, व्यवस्थापिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका, शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त [48]।
  • संविधान: अर्थ, संविधान के स्रोत, संविधान के प्रकार, शासन प्रणालियाँ (संसदीय एवं अध्यक्षीय शासन प्रणाली, एकात्मक व संघीय शासन प्रणाली), दलीय पद्धति, दबाव समूह [48]।
  • भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन का संक्षिप्त इतिहास [48]।
  • निर्वाचन आयोग [48]।
  • संघीय शासन: अर्थ, परिभाषा एवं विशेषताएँ, राष्ट्रपति, संसद, कैबिनेट एवं प्रधानमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय [48]।
  • राज्य शासन: राज्यपाल, विधान परिषद और मुख्यमंत्री, केन्द्र व राज्य संबंध [48]।
  • राजनीतिक दल एवं मुद्दे: राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दल, भारतीय राजनीति के मुख्य मुद्दे (जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्रीयता, गरीबी) [48]।
  • राजनैतिक चिंतन का स्वरूप:
    • भारतीय राजनीतिक विचारक: कौटिल्य, राजा राममोहन राय, दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, लोकमान्य तिलक [48]।
    • पाश्चात्य राजनैतिक चिंतक: सुकरात, प्लेटो, अरस्तु, रूसो, मेकयावली [48]।
  • राजनैतिक विचारधाराएं: उदारवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद, गांधीवाद [48]।
  • विश्व की महत्वपूर्ण शासन प्रणालियाँ: ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरीका व स्विटजरलैण्ड की शासन प्रणाली; संयुक्त राज्य अमेरिका तथा स्विटजरलैण्ड के संविधान संशोधन प्रक्रिया का तुलनात्मक अध्ययन [48]।
  • भारत एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध: विश्व राजनीति में भारत की स्थिति, भारत का अन्य राष्ट्रों से संबंध, भारत की विदेश नीति (सिद्धान्त, उद्देश्य, तत्व एवं उनकी समस्याएँ), संयुक्त राष्ट्र संगठन (कार्यप्रणाली, निशस्त्रीकरण, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ), भारत तथा संयुक्त राष्ट्र, भारत तथा दक्षेस (SAARC), भारत तथा आसियान (ASEAN), भारत तथा यूरोपीय सांझा व्यापार, वैश्वीकरण एवं निःशस्त्रीकरण [48]।
  • लोक प्रशासन:
    • अर्थ, प्रकृति एवं क्षेत्र, लोक प्रशासन एवं निजी प्रशासन में अंतर, लोक प्रशासन की अध्ययन पद्धतियाँ [48]।
    • केन्द्रीयकरण एवं विकेन्द्रीकरण तथा शक्ति का हस्तांतरण [48]।
    • कार्मिक प्रशासन, भर्ती, पदोन्नति, प्रशिक्षण, संघीय लोक सेवा आयोग [48]।
    • वित्तीय प्रशासन, बजट, भारत में बजट निर्माण की प्रक्रिया [48]।
    • विकास प्रशासन, नौकरशाही (प्रकृति एवं कार्य), लोकपाल एवं लोकायुक्त [48]।
120 MCQ / 120 Marks

इतिहास (History)

मुख्य चयन विषय पाठ्यक्रम

  • इतिहास से आशय, इतिहास जानने के स्रोत [44]।
  • मानव का शिकारी एवं खाद्य संग्राहक जीवन, पुरापाषाणिक संस्कृति, मध्यपाषाणिक संस्कृति का विकास एवं विस्तार (शैलकला के विशेष संदर्भ में) [44]।
  • हड़प्पा एवं उत्तर हड़प्पा संस्कृति, लौहयुगीन संस्कृतियाँ (उत्तर एवं दक्षिण भारत की महापाषाणिक संस्कृति) [44]।
  • धार्मिक एवं दार्शनिक विचारों का विकास एवं आधारभूत अध्ययन (बौद्ध, जैन, वैदिक) [44]।
  • राज्य एवं गणराज्यों का उदय एवं विस्तार [44]।
  • संबंधित कालखण्ड के राजनीतिक इतिहास का ज्ञान प्राप्त करना (मौर्य, शुंग, पश्चिमी क्षत्रप, सातवाहन, कुषाण, गुप्त, वर्धन, मौखरी, चेर, चोल, पाण्डय, चालुक्य, पल्लव आदि राजवंश एवं उनका शासन प्रबंध) [44]।
  • राजपूतों का उदय, प्रतिहार, पाल, चंदेल, राष्ट्रकूट, परमार, कलचुरी, चौहान, गहड़वाल, मुस्लिम आक्रमण [44]।
  • मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत, दिल्ली सल्तनत की स्थापना और विस्तार, सल्तनत कालीन सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक जनजीवन व प्रशासनिक व्यवस्था, सल्तनत कालीन प्रमुख घटनाएँ एवं आन्दोलन [44]।
  • मुगल साम्राज्य का सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार, मुगलशासकों का प्रशासन, आर्थिक एवं सामाजिक जीवन, नादिरशाह का आक्रमण एवं उसका प्रभाव, मुगल साम्राज्य का पतन; मराठा शक्ति का उदय, 1857 के पूर्व अंग्रेजों का जन विद्रोह [44]।
  • यूरोपियनों का भारत आगमन, ब्रिटिश शासन की स्थापना एवं भारतीय क्षेत्रों में उनके युद्ध (संघर्ष), ब्रिटिश नीतियां एवं उनका प्रशासनिक ढांचा, 1857 का संग्राम (कारण, स्वरूप व परिणाम), भारतीय पुनर्जागरण, नवीन भौगोलिक एवं वैज्ञानिक खोजें, राष्ट्रीय आंदोलन (धार्मिक आन्दोलन), भारतीय स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन और उसका प्रभाव, स्वतंत्र भारत और तत्कालीन चुनौतियाँ, विश्वयुद्धों का कारण, घटना एवं प्रभाव, राष्ट्रसंघ एवं संयुक्त राष्ट्रसंघ, विश्व की प्रमुख क्रान्तियाँ व उनका भारत पर प्रभाव [44]।
  • विभिन्न कालखण्डों में सामाजिक विकास: वर्ण, जाति, उपजाति, विवाह, संस्कार, पुरुषार्थ एवं सामाजिक जनजीवन तथा उनमें बदलाव [44]।
  • कला का विकास एवं अध्ययन (स्थापत्य, मूर्तिकला, चित्रकला, लेखन एवं धातु कला आदि); मध्यप्रदेश का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम एवं राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान [44]।
  • विश्व इतिहास का परिचय, विश्व के महत्वपूर्ण साम्राज्य (चीन साम्राज्य, ग्रीक एवं रोमन साम्राज्य), विश्व के महत्वपूर्ण प्राचीन नगर (तक्षशिला, पाटलिपुत्र, बेबीलोन), उपनिवेशवाद (प्रथम एवं द्वितीय अफीम युद्ध, बॉक्सर विद्रोह), जापान का आर्थिक विकास एवं सैन्यीकरण [44]।
  • जर्मनी एवं इटली का एकीकरण [44].
120 MCQ / 120 Marks

भूगोल (Geography)

मुख्य चयन विषय पाठ्यक्रम

1. भौतिक भूगोल
  • अर्थ, प्रकृति एवं अध्ययन क्षेत्र, महत्व, पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास संबंधी सिद्धांत; वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत, प्लेट विवर्तनिकी, पृथ्वी का आंतरिक एवं वाह्य स्वरूप, भूकम्प एवं ज्वालामुखी, सुनामी, चक्रवात इत्यादि [45]।
  • स्थलमण्डल: चट्टानों के प्रकार और संघठन, अपक्षय, उच्चावच, भौगोलिक कारक एवं प्रक्रिया, अपरदन, परिवहन और निक्षेपण; नदियाँ, भूमिगत जल, हिमानी, सागरीय जल एवं पवन के कार्य तथा इनसे बने भू-रूप [45]।
  • वायुमण्डल: वायुमण्डल का संगठन एवं परतें, मौसम एवं जलवायु एवं उसके तत्व, वायुमण्डलीय तापमान, सूर्यताप (वितरण, प्रभावित करने वाले कारक, ताप कटिबन्ध); वायुदाब एवं पवनें (स्थायी व स्थानीय), वायुमण्डलीय आर्द्रता, जलवाष्प, संघनन, कुहरा, पाला, ओस, बादल, वर्षा के प्रकार, तडित झंझा, जलचक्र, चक्रवात एवं प्रति चक्रवात; विश्व के जलवायु प्रदेश, विश्वताप वर्धन एवं जलवायवीय परिवर्तन, ग्रीन हाउस प्रभाव [45]।
  • जलमण्डल: महासागरीय नितल के उच्चावच, महाद्वीपीय निमग्न तट, महाद्वीपीय ढाल, महासागरीय मैदान एवं महासागरीय गर्त; हिन्द, प्रशान्त एवं अटलांटिक महासागर के नितल; महासागरीय जल का क्षैतिज एंव लंबवत तापमान एवं लवणता वितरण; लहरें, ज्वारभाटा, महासागरीय धाराएँ एवं प्रवाल भित्तियाँ; महासागरीय जीव-जंतु, वनस्पति एवं महासागरों का मानव जीवन पर प्रभाव [45]।
  • जैवमण्डल: पारिस्थितिकी एवं पारिस्थितिकी तंत्र, मानव व उसका पर्यावरण संबंध, प्रभाव, संरक्षण; मानवीय क्रियाकलापों का पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव (प्रदूषण, ओजोन छिद्र, वन अपरोपण, नगरीयकरण, औद्योगीकरण आदि), संरक्षण आंदोलन (चिपको आंदोलन, साइलेण्ट वेली, सी.एन.जी., जल संरक्षण के प्रयास आदि) [45]।
2. आर्थिक एवं मानव भूगोल (विश्व के संदर्भ में)
  • कृषि एवं खनिज: गेहूँ, चावल, गन्ना, चाय, कहवा, कपास, जूट, ऊन, रबर एवं मत्स्योत्पादन का विश्व वितरण; अर्थव्यवस्था का भूमण्डलीकरण; खनिजों के उत्खनन को प्रभावित करने वाले कारक, लौह अयस्क, मैगनीज, टंगस्टन, क्रोमाइट, टिन, जिंक, तांबा, बाक्साइट का विश्व उत्पादन, वितरण एवं संचित भण्डार [45]।
  • ईंधन, उद्योग एवं परिवहन: कोयला, पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस, जल विद्युत तथा गैर परम्परागत स्रोत; विनिर्माण उद्योग (लोहा इस्पात, सूतीवस्त्र, पेट्रो रसायन, उर्वरक उद्योगों का उत्पादन, वितरण, स्थानीयकरण के कारक एवं विश्व व्यापार); परिवहन के साधनों का महत्व और प्रमुख परिवहन मार्ग (जल-थल-वायु) [45]।
  • मानव भूगोल एवं जनसंख्या: अर्थ, प्रकृति, क्षेत्र, विषयवस्तु और शाखाएँ; मानव-वातावरण सम्बन्ध, मानव प्रजाति समूह और विशेषताएँ; वातावरण के साथ अनुकूलन (ठंडे, गर्म एंव पठारी प्रदेशों के निवासी); विश्व जनसंख्या वितरण प्रतिरूप, वृद्धि, लिंग अनुपात, ग्रामीण व नगरीय संरचना; मानव विकास सूचकांक; ग्रामीण एवं नगरीय अधिवास प्रतिरूप [45]।
3. भारत एवं मध्यप्रदेश का भूगोल
  • भारत का भूगोल: भौतिक स्वरूप एवं धरातलीय बनावट, अपवाह तंत्र, जलवायु, मानसून की उत्पत्ति, प्रादेशिक एवं मौसमी विभिन्नताएँ, मानव जीवन पर जलवायु का प्रभाव; प्राकृतिक संसाधन (मिट्टियाँ, कृषि भूमि उपयोग, प्रमुख फसलें, मृदा, वन, मत्स्य, पशु संसाधन, जल संसाधन की उपलब्धता, सिंचाई, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन) [46]।
  • मानवीय क्रियाकलाप: प्राथमिक (संग्रहण, पशुपालन, खनन, कृषि), द्वितीयक (विनिर्माण, वन, कृषि), तृतीयक (व्यापार, यातायात, संचार, शिक्षा व स्वास्थ्य) एवं चतुर्थक क्रियाकलाप (विशिष्ट ज्ञान आधारित उद्योग, सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक, उपग्रह संचार) [46]।
  • औद्योगिक व जनसंख्या परिदृश्य: उद्योगों के प्रकार (कुटीर एवं वृहत, लौह इस्पात, सूतीवस्त्र एवं शक्कर उद्योगों का वितरण व स्थानीकरण); जनसंख्या वितरण, घनत्व वृद्धि एवं नियंत्रण के उपाय, क्षेत्रीय विभिन्नताएं; ग्रामीण व नगरीय बस्तियां [46]।
  • मध्यप्रदेश का भूगोल: भौतिक स्वरूप, जलवायु, अपवाह तंत्र, वर्षा का वितरण, वन, कृषि, खनिज, शक्ति के संसाधन, जनसंख्या एवं जनजातीय समुदाय [46]।
  • आपदा प्रबंधन: प्राकृतिक एवं मानवकृत आपदाओं (बाढ़, सूखा, भूकम्प, सूनामी, चक्रवात, भूस्खलन) के कारण, परिणाम एवं प्रबंधन [46]।
4. प्रायोगिक भूगोल
  • मानचित्रकला: मापक के प्रकार व प्रदर्शन की विधियाँ, रूढ़चिन्ह व रंगों का उपयोग, उच्चावच्च का प्रदर्शन; मानचित्रण तकनीक व पठन (वितरण, मौसम, स्थलाकृतिक मानचित्र), मानचित्र प्रक्षेप (शंक्वाकार, ध्रुवीय समदूरी, मरकेटर प्रक्षेप) [46]।
  • सर्वेक्षण एवं सांख्यिकी: सर्वेक्षण के प्रकार, महत्व, उपकरण एवं विधियाँ; एरियल फोटो व सैटेलाइट इमेजेस की व्याख्या; आधारभूत सांख्यिकी विधियाँ (माध्य, माध्यिका एवं बहुलक), भौगोलिक विश्लेषण और उपयोग, समुच्च रेखाएं [46]।
120 MCQ / 120 Marks

अर्थशास्त्र (Economics)

मुख्य चयन विषय पाठ्यक्रम

  • अर्थशास्त्र की मूल अवधारणाएं: परिभाषा, प्रकृति, क्षेत्र, अध्ययन की विधियां, व्यष्टि एवं समष्टि अर्थशास्त्र, भारतीय एवं पाश्चात्य आर्थिक विचार, अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएं [49]।
  • उपभोग, मांग एवं पूर्ति: उपभोग एवं उपयोगिता (अर्थ, प्रकार, महत्व, उपयोगिता ह्रास नियम, उपभोक्ता संतुलन, उपभोक्ता की बचत); उत्पत्ति के नियम एवं पैमाने के प्रतिफल, पूंजी निर्माण एवं बचत; मांग एवं पूर्ति के नियम, मांग एवं पूर्ति की लोच, लागत एवं आगम [49]।
  • उत्पादन, बाजार एवं वितरण: उत्पादन अवधारणा, विशेषताएं एवं उत्पादन के साधन; बाजार का अर्थ, तत्व, वर्गीकरण, पूर्ण प्रतियोगिता में मूल्य निर्धारण; वितरण के सिद्धान्त (लगान, मजदूरी निर्धारण, व्याज, लाभ के सिद्धान्त) [49]।
  • मुद्रा एवं आर्थिक संवृद्धि: मुद्रा का अर्थ, कार्य, प्रकार, परिमाणात्मक सिद्धान्त, नकद-व्यवहार एवं नकद शेष, कीन्स का दृष्टिकोण; मुद्रा स्फीति, मुद्रा विस्फीति एवं मंदी; आर्थिक संवृद्धि व विकास के सूचक, भारत के आर्थिक सुधार कार्यक्रम, पंचवर्षीय योजनाएं, वृद्धि के प्रतिरूप, धारणीय (सस्टेनेबल) विकास एवं पर्यावरण पर प्रभाव [49]।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना:
    • प्राकृतिक संसाधन (भूमि, जल एवं वन) एवं जनसंख्यात्मक परिदृश्य (आकार, स्त्री-पुरुष अनुपात, ग्रामीण-शहरी वितरण, सकल घरेलू उत्पाद) [49]।
    • कृषि व उद्योग: कृषि की प्रकृति व महत्व, हरितक्रांति पुनर्मूल्यांकन, ग्रामीण कृषि बाजार में उधार लेनदेन, म.प्र. के बाजार प्रतिरूपों में परिवर्तन; औद्योगिकीकरण में सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका, निजी व सार्वजनिक क्षेत्र का पुनर्गठन, लघु उद्योगों का महत्व, म.प्र. में औद्योगिकीकरण की समस्याएं [49, 50]।
    • अधोसंरचनात्मक सुविधाएं (बिजली, यातायात, संचार); भारतीय अप्रवासी व्यापार संगठन, भुगतान शेष, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की भूमिका एवं बहुराष्ट्रीय निगम [50]।
    • स्वतंत्रता उपरान्त योजनाएं (उद्देश्य, रणनीति, उपलब्धियां व असफलताएं), गरीबी की समस्या, मूल्य वृद्धि व बेरोजगारी [50]।
  • राष्ट्रीय आय, लोकवित्त एवं बैंकिंग:
    • राष्ट्रीय आय की अवधारणा, कुल घरेलू उत्पाद (GDP), कुल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP), शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP), राष्ट्रीय आय का मापन एवं लेखांकन [50]।
    • लोकवित्त: सार्वजनिक एवं निजी वित्त, अधिकतम सामाजिक लाभ का सिद्धान्त, आगम के स्रोत (कर, ऋण, अनुदान), करारोपण व सार्वजनिक व्यय के सिद्धान्त, बजट की अवधारणा [50]।
    • बैंकिंग: रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एवं व्यापारिक बैंकों के कार्य; साख नियंत्रण (परिमाणात्मक एवं गुणात्मक विधियाँ), मौद्रिक नीति के उद्देश्य व सीमाएं, साख निर्माण, आधुनिक बैंकिंग सुधार एवं सस्ती मुद्रा नीति [50]।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं सांख्यिकी: विकसित एवं विकासशील देशों में व्यापार, व्यापार व भुगतान संतुलन (असंतुलन सुधारने के उपाय), विदेशी विनिमय दर, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धान्त (निरपेक्ष एवं सापेक्ष लाभ), अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन का निहित प्रभाव [50]।
  • सांख्यिकी: समंक संकलन (Collection of Data), रीतियां, वर्गीकरण, सारणीयन व प्रस्तुतीकरण; केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप (माध्य, माध्यिका, भूयिष्टिक/बहुलक), विचलन, प्रमाप विचलन, सहसंबंध (कार्ल पियर्सन एवं स्पियरमैन का श्रेणी सहसंबंध गुणांक), श्रेणी चिह्न परीक्षण [50].
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समाजशास्त्र (Sociology)

मुख्य चयन विषय पाठ्यक्रम

1. समाजशास्त्र का परिचय एवं भारतीय समाज
  • मूल अवधारणाएं: अर्थ, परिभाषा, विषयवस्तु, क्षेत्र, महत्व एवं प्रकृति; समाज, समुदाय, संस्था, समिति, सामाजिक समूह, प्रस्थिति एवं भूमिका, सामाजिक संरचना, संस्कृति; व्यक्ति एवं समाज में संबंध, समाजीकरण, सामाजिक नियंत्रण, मूल्य एवं आदर्श नियम, सामाजिक स्तरीकरण, सामाजिक गतिशीलता [54]।
  • सामाजिक परिवर्तन एवं प्रक्रियाएं: परिवर्तन के कारक एवं सिद्धांत (उद्विकास, विकास, प्रगति, क्रांति); सामाजिक प्रक्रियाएं (सहयोग, समायोजन, सात्मीकरण, प्रतिस्पर्धा, संघर्ष); सामाजिक आंदोलन, सामाजिक विचलन, सामाजिक विघटन; व्यवहारिक समाजशास्त्र व सामाजिक कल्याण [54]।
  • भारतीय समाज की संरचना: धर्म, वर्ण, आश्रम, पुरुषार्थ तथा संस्कार; अध्ययन उपागम (तार्किक/सांस्कृतिक, संरचनात्मक/ऐतिहासिक); गांव, नगर, ग्रामीण-नगरीय सातत्य, सांस्कृतिक विविधता में एकता, जनांकिकी; अनुसूचित जाति, जनजाति, ओ.बी.सी. की समस्याएं व समाधान; महिलाएं एवं अल्पसंख्यक समूह [54]।
  • आधारभूत संस्थाएं एवं रूपांतरण: जाति, नातेदारी, परिवार एवं विवाह की परिवर्तनशील स्थिति; औद्योगीकरण, नगरीकरण, पश्चिमीकरण, आधुनिकीकरण, संस्कृतिकरण, धर्मनिरपेक्षता; भूमण्डलीकरण एवं उदारीकरण का प्रभाव [54]।
2. ग्रामीण, नगरीय एवं जनजातीय समाजशास्त्र
  • ग्रामीण एवं नगरीय समाजशास्त्र: अर्थ, परिभाषा, विषयवस्तु और महत्व; प्रवजन (Migration – कारण एवं प्रभाव); जजमानी व्यवस्था एवं कृषि संबंध, हरित क्रांति; ग्रामीण नेतृत्व, प्रभावशाली जाति व गुटवाद, पंचायती राज व्यवस्था; नगरीय विकास के मुद्दे (बसाहट एवं मलिन बस्ती), नगरीय स्थानीय स्वशासन [54]।
  • जनजातीय समाजशास्त्र: अनुसूचित जनजाति की विशेषताएं, जनांकिकीय परिचय व भौगोलिक वितरण; जनजातीय महिलाओं की स्थिति व पंचायती राज में सहभागिता; परिवार, विवाह, नातेदारी, धर्म, विश्वास एवं टोटम; जनजातीय अर्थव्यवस्था, ऋणग्रस्तता, भूमि अलगाव, कृषक शोषण, अशिक्षा व बेरोजगारी; मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के संदर्भ में जनजातियाँ (गौड़, भील, कोरकू, भारिया एवं मारिया) [54, 55]।
3. समाजशास्त्र के विचारक एवं अनुसंधान विधि
  • प्रमुख विचारक एवं उनका योगदान:
    • अगस्ट काम्टे: प्रत्यक्षवाद, विज्ञानों का संस्तरण, तीन स्तरों का नियम [55]।
    • इमाइल दुर्खीम: सामाजिक तथ्य, आत्महत्या का सिद्धांत, धर्म का सिद्धांत, श्रम विभाजन [55]।
    • मैक्स वेबर: आदर्श प्रारूप, सामाजिक क्रिया का सिद्धांत, सत्ता का सिद्धांत [55]।
    • कार्ल मार्क्स: द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद, वर्ग संघर्ष, सामाजिक परिवर्तन [55]।
    • अन्य विचारक: टेलकॉट पारसन्स, आर. के. मर्टन, विल्फ्रेडो पेरेटो, महात्मा गांधी, राधाकमल मुखर्जी, बाबा साहेब अम्बेडकर, एम.एन. श्रीनिवासन, ए.आर.देसाई, जी.एस.धुरिये, डी.पी.मुखर्जी [55]।
  • सामाजिक अनुसंधान विधि: वैज्ञानिक शोध के चरण, शोध प्रारूप, सामाजिक सर्वेक्षण (उद्देश्य व प्रकार); अनुसंधान की पद्धतियां (ऐतिहासिक, तुलनात्मक, प्रकार्यात्मक, वैयक्तिक अध्ययन, सांख्यिकीय, निदर्शन); तथ्य संकलन (साक्षात्कार, अनुसूची, प्रश्नावली, अवलोकन); अनुमापन प्रविधियां, अंतर्वस्तु विश्लेषण, तथ्यों का वर्गीकरण व सारणीयन [55]।
  • सांख्यिकी एवं जनसंचार: केन्द्रीय प्रवृत्ति का मापन (माध्य, मध्यिका, बहुलक, माध्य विचलन, प्रमाप विचलन, सहसंबंध, काई वर्ग परीक्षण); तथ्यों का चित्रमय व रेखाचित्र प्रस्तुतीकरण, कम्प्यूटर का उपयोग; जनसंचार के साधन और सांस्कृतिक परिवर्तन में भूमिका [55]।
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